Sunday, February 19, 2012


पत्ता...(110112)
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खुद को
मैं
वो पत्ता समझता था
जो
मिट्टी के ढेले के नीचे दबा है
जिसे
कोई खिसका नहीं सकता

ये गफतल थी मेरी

कब
पानी बरसा
ढेला घुल गया
कब
हवा चली
मैं
उड़ गया

ये हकीकत है मेरी

खुद को
मैं
वो पत्ता समझता था...

अब
निशान भी धुंधले हो रहे
कुरेदूं
तो दर्द
न खरोचूं
तो
निशान मिट जाने का डर
क्या करूं, कैसे सुलझूं

खुद को
मैं
वो पत्ता समझता था...
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फिर लगा
महसूस हुआ
तुम
वो
गुबार हो
गुबार छंटा
मैं
छूट गया
कह दो
ये सब झूठ है...

क्रिसमस(251211)
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याद है
वो क्रिसमस की रात थी
ठिठुरन बहुत थी
ठंड कमाल की थी
मैं
तुम्हारे घर आया था
टोपी पहनी थी
जर्सी की हुड कैप लगाई थी
ऊपर से
मफलर बांधा था
तुमने
लल्लूलाल कहा था
याद है
वो क्रिसमस की रात थी
8 रुपए की सौ ग्राम मूंगफली
और
10 वाली Bar-One लाया था
देर तक बातें की थीं
दांतों को दबाकर
होंठों को भींचकर
खूब शोर मचाया था
रात भर सोए नहीं थे
सिर्फ
एक दूसरे में खोए थे
एक दूसरे में खोए थे
एक दूसरे में खोए थे...
याद है
वो क्रिसमस की रात थी
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आज भी
क्रिस्मस की रात है
पर
ठंड नहीं है
सिर्फ
एक शर्ट पहनी है
बाहें भी मोड़ रखी हैं
आज भी देखती
तो
लल्लूलाल कहती
आज भी
क्रिस्मस की रात है
पर
मूंगफली के दाने नहीं हैं
चॉकलेट
खाना भूल गए हम
ढ़ेर सारी बाते हैं
कहने को कोई नहीं
आज भी
क्रिस्मस की रात है
दांतों को दबाया है
होठों को भींचा है
जी भर के रोया है
खामोशी का शोर है
रात भर
आज भी नहीं सोए हैं
फिर भी
आज हम खोए हैं
आज हम खोए हैं
आज हम खोए हैं
आज भी
क्रिस्मस की रात है...

Wednesday, January 4, 2012


पंक्तियां(030112)
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कुछ पंक्तियां खोजी थीं...
सोचा था घर ले जाऊंगा...
पर कहीं बिखर गईं...
सारी की सारी खो गईं...

अब क्या करूं...
किससे पूछूं...
जननी तो चली गई...
जिसके लिए खोजी थी...
वो छोड़ गई...

कुछ पंक्तियां खोजी थीं...
सोचा था घर ले जाऊंगा...
पर कहीं बिखर गईं...
सारी की सारी खो गईं...

नई तलाश करूं...
नई शुरूआत करूं...
डर रहा हूं...
खुद को...
असहाय पा रहा हूं...

कुछ पंक्तियां खोजी थीं...
सोचा था घर ले जाऊंगा...
पर कहीं बिखर गईं...
सारी की सारी खो गईं...

अब कैसे खोजूं...
हिम्मत कैसे जुटाऊं...
कैसे मानूं...
अब जो तलाश करूंगा...
वो मैं पूरी निभाऊंगा...

कुछ पंक्तियां खोजी थीं...
सोचा था घर ले जाऊंगा...
पर कहीं बिखर गईं...
सारी की सारी खो गईं...

खुद पर संदेह है...
क्योंकि...
जिन्हें खोजा था...
उसे संजो न सका...
अब क्या सफल हो पाऊंगा...

कुछ पंक्तियां खोजी थीं...
सोचा था घर ले जाऊंगा...
पर कहीं बिखर गईं...
सारी की सारी खो गईं..

Saturday, December 10, 2011


वक्त में पीछे जाकर कोई कितना आगे बढ़ गया... वक्त में आगे चलने वाले कहीं पीछे छूट गए...


Sunday, September 4, 2011







मुंबई का मौसम बड़ा बेईमान है
आंखों में धूल झोंककर मेघ लाता है
सावन का जबतक हो एहसास
चटकीली धूप का रंग निखर आता है

Wednesday, February 2, 2011

हमारी इमारत...




इमारत से धुंध हटेगी...
पुरानी नेम प्लेट पर जमी गर्द हटेगी...
सूरज आज कोहरे की चादर से बाहर निकला है...
दिल में दबे दर्द की टीस क्या कुछ कम होगी...
जिस इमारत में प्यार की ईंटों को...
मोहब्बत से जोड़ा था...
आज फिर उस इमारत को दूर से देखा...
सोचा धुंध है...
चार कदम आगे बढ़ा...
इमारत के किनारों पर...
टिमटिमाती रोशनी दिखी...
दिल को सुकून मिला...
जिस इमारत को अपना कहते हैं...
उसपर आज भी शबनमी बूंदें ठहरती हैं...
अब इमारत के और नजदीक था...
इमारत अभी भी धुंधली थी...
अब समझ आया...
जिसे धुंध समझ रहे थे...
वो तो धूल है...
इमारत के किनारों से टिमटिमाती रोशनी का सच भी सामने था...
टूटे हुए शीशे से...
बल्ब की रोशनी झांक रही थी...
शायद तकदीर में यही था...
दोस्ती सूरज से की थी...
निभाने जुगनु आया...

Wednesday, December 1, 2010

भोगस है शीला की जवानी !


शीला, शीला की जवानी...

ऐसा नहीं लगता कि, किसी सी ग्रेड फिल्म का टाइटल है ये। "शीला की जवानी..." फराह खान की नई फिल्म तीस मार खान का सबसे ज्यादा मोस्ट अवेटिंग सॉन्ग। फिल्म शुरू होने के पहले से ही गाने की चर्चा शुरू हो गई थी। फराह खान ने तो बकायदा एलान कर रखा है कि "शीला की जवानी..." जैसा कोई आइटम नंबर आज तक बना ही नहीं है। लेकिन मुझे ऐसा कुछ भी खास नहीं लगा "शीला की जवानी..." में। मुझे तो "शीला की जवानी..." नहीं भाई। ऐसा लगा जैसे में शकीरा के वाका-वाका और एश्वर्या के इश्क कमीना गानों के डांस की मिमिक्री देख रहा हूं। शीला यानी कि कटरीना को फराह ने डमी की तरह से इस्तेमाल किया है, वो डमी जो शकीरा के जैसे बैले और एश्वर्या की तरह कपड़े पहने दिख रही है। गाने के बोल की बात करें तो "शीला... शीला की जवानी...." सिर्फ इसी लाइन में दम नजर आता है, बाकी तो शीला की जवानी की धूप खिलने से पहले ही उतर गई है।


फराह की शीला में कुछ खास नहीं दिखा, इससे अच्छा तो शिल्पा शेट्टी नाच लेती है। गानों की बात करें तो बाबू जी जरा धीरे चलो, मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने, जबा पे लागा नमक इश्क का, बीड़ी जलइले, शट-अप एन बाउन्स कहीं ज्यादा भाते हैं। शीला की जवानी को हिप-हॉप और रैप करने के चक्कर में फराह ने गोंड दिया है। शीला ने भी सिर्फ डांस पर ही ध्यान दिया है।


फराह तो शीला की टक्कर मुन्नी से भी करा रही हैं। लेकिन भूल गई कि मुन्नी से बेहतर आइटम गर्ल कोई नहीं है। तभी तो मलाइका का जलवा छैइया-छैइया से लेकर मुन्नी बदनाम हुई तक बदसतूर बरकरार है।


तो मैडम फराह, तीस मार खान भले ही हाथ से निकल जाए लेकिन, शीला की जवानी हाथ में आकर भी फिसल गई है...